Monday, 25 June 2018

दोष निवारण के उपाय---
ज्योतिष-विद्या वह विज्ञानं है जो प्राक्रतिक नियमो की व्याख्या करती है।यह पूर्ण-रूपेण कर्म और पुनर्जन्म के सिद्धांत पर आधारित है।यहाँ पर न्यूटन के तीसरे नियम का समर्थन करती है कि प्रत्येक क्रिया की विपरीत प्रतिक्रिया होती है।यह सिद्ध होता है की कोई भी कर्म व्यर्थ नहीं जाता और बिना कारन कुछ नहीं होता। इस कारन से ज्योतिष विद्या को निर्णयात्मक विज्ञानं कहा जाता है।योग्य ज्योतिष द्वारा दिए गए यथार्थ फलादेश निश्चित ही फलित होते हैं,चाहे कोई उपाय करे या न करे।सभी मामलो में उपाय अशुभ से बचने के लिए पूर्ण सुरक्षा प्रदान नहीं करते।यह सभी को प्रत्याभूत भी नहीं होते। वे जो उपायों में विश्वास रखते हैं वो पूछते हैं कि यदि कोई अशुभता उपायों द्वारा कम नहीं की जा सकती तो क्यों ऋषियों ने अशुभता मिटने हेतु उपायों को निर्दिष्ट किया।यदि प्रत्येक क्रिया की प्रतिक्रिया होती है तो उपाय कैसे विफल हो सकते हैं? ज्योतिष-विद्या कहती है भाग्य को बदला नहीं जा सकता। प्रारब्ध से क्या तात्पर्य है इसे जो ज्योतिष नहीं हैं,वे सामान्यतः उचित रीती से समझ नहीं पाते हैं।प्रारब्ध वह होता है जो पिछले जन्म में किये कर्मो की वजह से जातक को इस जन्म में मिलता है।किसी व्यक्ति का प्रारब्ध इस जन्म में उपाय करने को प्रेरित करता है।
अब यहाँ यह देखिये 
A--- जातक ने 50000 रुपये किसी के धोखाधड़ी से मार दिए हैं, 

और
B--- जातक ने 100 रुपये का धोखा दिया है।
अब दोनों ने 100 रुपये का दान किया तो A जातक को तो कष्ट रहेगा ही क्योंकि उसके द्वारा किया गया दान नगण्य है, B द्वारा किया गया दान उसके कष्ट कम कर देगा ,क्योंकि वो क़र्ज़ से मुक्त हो चूका है । कुछ अपराध या कर्म जो जातक ने किये है वो अछम्य होते है जैसे किसी की हत्या करना,फिर वे चाहे इश्वर की कितनी भी आराधना करे उन्हें उसका दंड भोगना ही होता है। जब किसी इंसान की ऐसे ग्रह की दशा चल रही हो जिस पर पाप ग्रहों की दृष्टी हो तो इसका मतलब है उसने पिचले जन्मो में पाप कर्म किये हैं। इसी तरह दो जातक ज्योतिष के पास आते हैं एक की दशा अभी अच्छी नहीं है और एक की बुरी दशा समाप्त होने वाली है तो जिसकी अच्छी दशा आने वाली है उसे तो उपाय का लाभ जल्दी मिल जायेगा। पर जिसकी अच्छी दशा आने में देर है उसे उपाय से फल देर से ही मिलेगा

Saturday, 23 June 2018

ईश्वर क्या है -ईश्वर वो आत्मा है जो आपके अंदर है ---जी हाँ ये आत्मा ईश्वर का ही अंश है कहाँ ढूंढ रहे हो सब ईश्वर ---ईश्वर आपकी माता है जो आपके पैर धरती पर नहीं पड़ने देती थी ईश्वर आपके पिताश्री हैं जो आपके लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देते थे, ईश्वर आपकी पत्नी के अंदर है जो आपके लिए यमराज से भी लड़ जाती है ईश्वर आपके उस बच्चे में हैं जो निष्पाप मुस्कराहट से आपकी तरफ देखता है और जिसे आज तक कोई नहीं समझ पाया कि बच्चे क्या सोचते हैं मन ही मन बचपन में। ईश्वर आपके मित्र में विराजमान हो जाता है जब आपका मित्र आपके सबसे बुरे वक्त में आपके साथ खड़ा हो जाता है और आपको दुश्वारियों से निकाल लेता है हमे पता भी नहीं चलता ईश्वर कब किस व्यक्ति के अंदर एक्टिवेट हो जाता है हम समझने में नाकाम हो जाते हैं।

Thursday, 21 June 2018

आजके आधुनिक बाबाओ के लगातार अन्दर जाने के परिप्रेक्ष्य में मेरी २ साल पुराणी पोस्ट। 
क्या माता पिता के रहते गुरु धारण करना चाहिए---
यदि मनुष्य माता-पिता की सच्चे मन से (बोझ समझ कर नहीं या केवल कर्तव्य निभाने के लिए नहीं) सेवा करता है, उनकी आज्ञा का पालन करता है ,उनके बताये मार्ग पर चलता है तथा उनके परामर्श का सम्मान करता है तो उसे उनके जीवित रहते किसी गुरु को धारण करने की कोई जरुरत नहीं है। क्योंकि माता-पिता से बड़ा कोई गुरु नहीं हो सकता। यदि माता-पिता में से एक भी जीवित है तो गुरु धारण करने का कोई कारण नहीं है। हाँ जब दोनों जीवित न हो तो गुरु धारण किया जा सकता है। यहाँ शिक्षा प्राप्त करने के लिए जो गुरु है उनकी बात नहीं की जा रही। धार्मिक गुरु की बात कर रहा हूँ जिसका चलन आजकल बहुत जोरो पर हैं और अच्छा खासा धंधा बन चुका है।

इसी तरह पति के जीवित रहते पत्नी को गुरु धारण नहीं करना चाहिए, क्योंकि पति से बढ़कर अन्य कोई भी उसके लिए गुरु नहीं हो सकता। आजकल कुछ विवाहित महिलाओ में गुरु धारण करने की होड़ सी लग गई है, हमारे धर्म में पति को परमेश्वर कहा गया है। जो स्त्री पति का तिरस्कार करती है और परिवार के कर्तव्यों से विमुख होकर या अपने कर्तव्यों को तिलांजलि देकर किसी धर्मगुरु, आचार्य या महाराज की कथा प्रवचन या उपदेश सुनने जाती है तो वो पाप की भागी होती है। धर्म का अभिन्न अंग कर्तव्य पालन करना होता है।

Wednesday, 20 June 2018

टेलीविज़न पर समाचार चैनेलो पर चलते ज्योतिष प्रोग्रामो को देखकर कोफ़्त होती है - जैसे स्क्रीन पर प्रचार चल रहा होता है '' इस उपाय के बाद आपके जीवन में होंगी खुशियाँ ही खुशियाँ'' या ''अब नहीं होगी आपके जीवन में धन की कमी'' या '' ये उपाय करे तो नहीं होगा दाम्पत्य जीवन में कलह'' अब दरअसल क्या है ये??? मज़बूरी उस ज्योतिष की भी है जो चैनेल पर आ रहा है कुछ न कुछ बोलना है ,दूसरी मज़बूरी ये भी है कि साधारण मनुष्य बुद्धि को ताक पर रखकर दिवास्वप्न के पीछे दौड़ना चाहता है। वहाँ सत्य बोलने वाला उनको अज्ञानी लगता है। जो उन्हें दिवास्वप्न दिखा रहा है दौड़ लेते हैं उसके पीछे -ये सोच कर कि शायद ये ज्योतिष बाबा सचमुच ''तीसरी आँख की शक्ति का अधिकारी है'' मज़बूरी उस ज्योतिषी की भी है जो जानता है ,वलोक लुभावन सुर्रे नहीं छोड़ेगा तो कोई नहीं पूछेगा उसे। ठीक उस राजनैतिक पार्टी की तरह जो अगर सब सच बोल देगी तो कभी सत्ता में नहीं आ पाएगी। कई लोगो को शायद मालूम नहीं विधान-सभा का चुनाव हो या लोकसभा का कुछ ऐसे लोग भी पिछले ४०-५० साल से चुनाव लड़ रहे हैं जो सचमुच ईमानदार है और सच बोलते हैं -मगर हर बार उनकी जमानत जब्त हो जाती है।

Tuesday, 19 June 2018

दाम्पत्य जीवन में शांति के लिए सिर्फ कुंडली का ही रोना न रोये और न ही ज्योतिष या ज्योतिष शाश्त्र को दोषारोप करते फिरे। दाम्पत्य जीवन में सुख चाहते हैं तो कुछ आपकी तरफ से भी ऐसा होना चाहिए जिससे जीवन में सुख शांति रहे -इस अड़ी पर न अड़े रहे कि हम तो जी अपने व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं लाएंगे ,बस ज्योतिषी कोई उपाय बता दे। कोई ऐसा रत्न पहना दे जिससे सब कुछ ठीक हो जाए। ज्योतिषीय उपाय भी तभी काम करते हैं जब आप उन उपायो को सफल करने के लिए व्यवहारिक ज्ञान का भी उपयोग करते है। कुछ ऐसी बाते हैं जिन्हे अपना कर आप अपना जीवन सुखी कर सकते हैं।

१--- विवाह के बाद घर की सारी जिम्मेदारी पत्नी पर आ जाती है। घर सम्भालना रसोई सम्भालना बच्चे हो तो उनको सम्भालना। ठीक है पति कमा कर लाता है ,पर कभी कभी उनके इन कामो में हाथ बटाएं। दाम्पत्य जीवन में मधुरता आती है। यहाँ इस वक्त पति की माँ को उचित है कि वो हस्तक्षेप न करे। क्योंकि जोरू का गुलाम जैसा शब्द माँ-बाप के  पहले निकलता है और पति चाहते हुए भी पत्नी की मदद नहीं करता। तो अगर आप माता-पिता है और आपके घर में बहु है तो  आपका कर्तव्य है कि आप बेटे और बहु की व्यक्तिगत जीवन में हस्तक्षेप न करे। जबकि ज्यादातर परिवारो में पति-पत्नी के झमेले के पीछे मूल रूप से माता-पिता जिम्मेदार होते है।

२--- पत्नी को भी चाहिए कि पति अपनी माता-पिता का अगर ख्याल रखता है तो उसे कटाक्ष न करे ,जरा अपने ऊपर लेकर सोचे कि कैसे अपने माता-पिता के बारे में सोच कर उसकी जान निकली जाती है।

३--- पत्नी के मायके में कोई काम हो तो पति को उसमे ख़ुशी-ख़ुशी मदद करनी चाहिए इससे पति-पत्नी में प्रेम बढ़ता है। जबकि हकीकत में पति ऐसा करना अपनी हेठी समझते हैं। कुछ ये आशा तो करते है कि उनकी पत्नी सास ससुर का पूर्ण सम्मान करे पर पति अपने सास-ससुर का सम्मान करना भूल जाता है ,यहाँ पत्नी के मन में तकलीफ होती है जो दाम्पत्य जीवन में जहर घोलता है।

४--- पत्नी कोई भी गलती करती है तो उसे तो दोषी बोलते ही है साथ में तुम्हारे माता-पिता ने क्या सिखाया ऐसा ताना मारना नहीं भूलते जो कि गलत है।

५--- कुछ पति अपने मन में बज्र धारणा बना कर चलते हैं कि उनकी पत्नी बज्र मुर्ख है और वो बहुत बड़े बुद्धिजीवी इसलिए भी उनके बीच मानसिक दुरी इतनी बढ़ जाती है कि दाम्पत्य जीवन में तनाव का कारण बनता है। पति अपने इस अहम को यहाँ त्यागे। पहल तो भारतीय परपंरा के अनुसार अक्सर पत्नी की उम्र कम ही होती है ,इसलिए यहाँ सहानुभूति पूर्ण व्यवहार करना चाहिए , खुद को पहले ही श्रेष्ठ मान कर उनसे व्यवहार न करे आपने कोई प्रतियोगिता नहीं जीतनी है।

६--- पत्नी को भी चाहिए कि अगर वो सम्पूर्ण घरेलु नारी है तो पति के बाहरी जीवन में बहुत ज्यादा ताक  झाँक न करे ,अक्सर शक करते रहने की वजह से भी जीवन में जहर घुल जाता है। क्योंकि आज प्रतियोगिता के युग में ऐसा बहुत कुछ करना पड़ता है जिसे नैतिकता कभी इजाजत नहीं देती पर जीना है तो पैसा कमाना  भी बहुत जरुरी है। आजकल कई बड़ी कम्पनियाँ अपने डीलरो इत्यादो को टूर पैकेज देती है। बड़ी कंपनी की तरफ से पार्टी दी जाती है जहाँ शराब और शवाब का नंगा नाच होता है। अब ये कुछ हद्द तक मज़बूरी भी बन जाता है। आपने जिन लोगो के साथ काम करना है तो पूरा न सही कुछ हद्द तक उनके रंग में रंगना पड़ता है। वरना यही पति सही तरीके से कमा कर नहीं लाएगा तो कुत्तो जैसा व्यवहार आप ही करेंगी उनसे। ऐसे मामलों जरुरत से ज्यादा सपर्श-कातर होना आपके दाम्पत्य जीवन का सत्यानाश कर सकता है।

७--- अक्सर पति अपनी बीवी की सबके सामने खिल्ली उड़ा देते हैं और अपनी पत्नी को शर्मिंदा करते हैं। ऐसा करना बहुत खतरनाक है। आपकी पत्नी की कोई गलती है भी तो उसे अकेले में समझाएं। दुसरो के सामने उसकी तारीफ करें ताकि आपकी पत्नी को लगे कि कोई है जो उसके समर्थन में है इससे आपसी प्रेम और विश्वास बढ़ता है।

८--- अपनी पत्नी के जन्म-दिन की तारीख और खास करके विवाह की तारीख न भूले। उनके लिए ये दोनों बहुत मायने रखती है। विवाह की तारीख ख़ास इसलिए क्योंकि आपकी पत्नी अपना सबकुछ त्याग कर उस दिन आपके पास आई हुई होती है। बहुत प्यार करने वाले लोगो को त्याग कर आई हुई होती है। उसे लगना चाहिए न जिसके लिए सब त्यागा वो भी उसे प्यार करता है।

९--- कोई भी समारोह हो जन्म-दिन विवाह इत्यादि अपनी पत्नी को साथ लेकर जाएँ और उन पार्टियो में फ्लर्ट न करे। घर में कोई भी समारोह हो अपनी पत्नी को भी मुख्य दायित्व में रखे नहीं तो बहुदा ऐसा होता है। रहती तो आपके साथ आपकी पत्नी है और ऐसे समारोहों में मुखिया कोई और बन कर हुक्म चलाने लगता है। ऐसा न करे। भले ही अपने सम्मान के खातिर अपने फूफा-जीजा -भाभी-चाची आदि को महत्व देना है पर अपनी पत्नी को महत्वहीन बना कर उन्हें महत्व ने दे। बराबर का महत्व दे।

१०--- पत्नी के लिए कोई न कोई उपहार लाते रहे। पत्नी भी अपने पति को कोई न कोई उपहार देती रहे -घर की मुर्गी दाल-बराबर न समझ ले। अपने दाम्पत्य जीवन में किसी तीसरे को दखल ने देने दे। चाहे वो आपके माता-पिता ही क्यों न हो।   फ़ालतू की बातें दिमाग में न लाये कि इससे माता-पिता का अपमान हो जाएगा और आपको नरक का भागी बनना पड़ेगा ,बड़े प्यार से उन्हें कह दे कि इस मामले को मैं खुद संभाल लूंगा। पत्नी को भी चाहिए कि अपने माता-पिता का दखल ने डाले।  आप ऊपर के स्वर्ग के चक्कर में यहाँ जीवन को नरक बना लेंगे।

११--- इस सब के बावजूद जिंदगी नहीं सुधर रही है तो शांति से अलग हो जाए।

यहाँ ऊपर जो भी लिखा है मेरा व्यक्तिगत आकलन व् अनुभव है।
उपायो का सच या उपायो का मिथ---

प्रश्न---क्या उपाय काम करते है?

उत्तर---इसका उत्तर इतना सीधा नहीं है। इसका उत्तर हाँ भी है और ना भी। हाँ कैसे? जब कोई बीमारी काबू वाली होती है यानी कोई रोग अगर एडवांस स्टेज क्रॉस न कर गया हो तो जो दवा काम कर जाती है -वही दवा रोग एडवांस स्टेज क्रॉस कर गया हो या रोग अंतिम पड़ाव पर हो तो वही दवा अपना कोई असर रोगी पर नहीं दिखाती।

प्रश्न---फिर ज्योतिष उपाय क्यों बताते है?

उत्तर---भई ,जिस तरह डॉक्टर रोग देकर दवा का निर्वाचन करता है कि दवा देनी है या नहीं ,या रोगी के घरवालो को दुआ मांगने परामर्श देना है, क्योंकि कई मामलो में डॉक्टर रोगी के परिवार को बोलते हैं न कि '' अब कुछ नहीं हो सकता रोगी को घर जाइए या मैने जो करना था कर दिया अब दुआ ही किसी काम आ सकती है। ठीक इसी तरह जब एक ज्योतिष देखता है कि उपाय देना है या नहीं उपाय करना है या नहीं।

प्रश्न---आजकल टेलीविज़न पर या फेसबुक के कई पेजो पर कई लोग उपाय डालते रहते है क्या हमें वो करने चाहिए?

उत्तर--- नहीं इस तरह उपाय नहीं करने चाहिए '' सरल उपाय जैसे घर से दही खाकर निकलना ,कुछ मीठा या गुड खाकर निकलना तक साधारण उपाय ठीक है। ''ठीक उसी तरह जैसे सर दर्द होता है तो दवा दूकान से हम ''सेरिडोन'' खरीद कर खा लेते है मगर सर में दर्द अगर ट्यूमर की वजह से होगा तो डॉक्टर के पास जाना ही होगा। ठीक वैसे ही उटपटांग उपाय इस तरह से नहीं चाहिए। वैसे भी टेलीविज़न पर उपाय बताने का चलन अब कम होता जा रहा है। पहले तो लोग प्रोग्राम शुरू होते ही डायरी लेकर बैठ जाते थे और जो सुनते थे लिखते रहते थे। अब हर चीज़ की एक सीमा होती है कितने उपाय बताएँगे आखिर ? फिर उपाय हास्यकर स्तर पर उतर गए थे। गरदन दाए घुमाए ,हाथ पीछे रखे टांग ऊपर उठाये ,पानी पहले सर पर डाले छत से दौड़ कर उतरे ,दायें कान से सुने बायाँ कान बंद करे। हालाँकि आखिरी शब्द मजाक के तौर पर मैने कहे। मगर उटपटांग उपाय बताना शुरू हो चूका था ,जैसे निर्मल बाबा ने कर दिया ''जलेबी खाओ-लिपस्टिक खरीदो -पानी-पूड़ी खाओ---बर्फी खाओ।

Sunday, 17 June 2018

Learn Astrology in simple way--- Sidhant speaks--- SSP
शनि से प्रभावित जातक या शनि महादशा हो या राशि शनि की हो या लग्न में शनि हो या जिस ग्रह की दशा चल रही हो उस भाव में शनि हो या जिस ग्रह की दशा चल रही हो शनि उस ग्रह के साथ हो या जिस ग्रह की दशा चल रही हो शनि की उस पर दृष्टि हो तो जातक -चाय या कॉफी ज्यादा गर्म नहीं पी सकता - कोशिश भी करे तो मुँह जल जाता है ----