Saturday, 16 June 2018

Astrology

दुनियाँ में १००% सही कुछ भी नहीं हर चीज़ की अपनी सीमायें हैं। ---अब जैसे एक ''तकिया कलाम'' बहुत इस्तेमाल होता है कि कोई दैवज्ञ(ज्योतिषी) गलत हो सकता है मगर ज्योतिष शाश्त्र कभी गलत हो ही नहीं सकता ,कोई ये नहीं बोलता कि ज्योतिष शाश्त्र की भी अपनी सीमायें है। ये तो कुछ ऐसा ही हुआ कि बस चलाने वाला गलत हो सकता है बस कभी गलत नहीं हो सकती। युग बहुत बड़ी चीज़ होती है युग परिवर्तन के साथ ही कुछ मान्यताये खत्म हो जाती है या इस्तेमाल के लायक नहीं रह जाती ---आज कई साधनाए है जिसमे स्त्री-पुरुष का योगदान जरुरी है मगर आधुनिक युग में आप ऐसा नहीं कर सकते या जायज नहीं है---अगर जायज हैं तो ''आशाराम बापू'' को दोषी न माने आप एकदम। हो सकता है वो कोई साधना कर रहे हो। पाराशर मुनि ने जो माता सत्यवती के साथ किया आज ऐसा करने का दुस्साहस कोई नहीं कर सकता।

Saturn

शनि का नाम सुनते ही या शनि की साढ़ेसाती का नाम सुनते ही या शनि की महादशा शुरू होने वाली है सुनते ही अच्छे अच्छो की रूह कांप उठती है ,कई नासमझ तो यहाँ तक सोचने लगने है कि ये ग्रह न होता तो अच्छा होता जैसे कई कहते हैं राहु-केतु न होते तो अच्छा होता ---मगर ये संभव नहीं है आप जानते हैं शनि वो वायु है जिसमे हम सांस लेते है अब जरा सोचिये वायु के बिना कोई जीने की कल्पना कर सकता है क्या? शनि कल पुरुष का दुःख है ये ठीक है शनि दुःख का कारक है मगर जरा सोचिये दुःख ही अगर न हो तो सुख को कैसे पहचानेंगे। रात अगर न हो तो दिन की कीमत क्या होती? शनि श्रम है श्रम के बिना कुछ भी संभव नहीं दुनिया में ---शनि कृषि का कारक है शनि ही न हो तो हमे भोजन ही न मिले। अब राहु केतु ---राहु आपका सामने का हिस्सा है केतु आपका पिछला हिस्सा जिसे आप देख नहीं पाते। अब बताये कैसे संभव है की राहु केतु न हो।
जरुरत से ज्यादा आध्यात्मिकता आपको पागल बना सकती है। रोजमर्रा का जीवन ही नहीं पूरी दुनियाँ ठप्प पड़ सकती है ,आध्यात्मिकता के नाम पर जो परोसा जाता है। अब हमारे पश्चिम बंगाल में एक खानदान के दिमाग में घुस गया कि आत्मा की मृत्यु नहीं होती सिर्फ शरीर की मृत्यु होती है ,अब अपनी इस सोच के तहत उनका मरने के बाद शरीर के दाह-संस्कार से विश्वास उठ गया ,इसी सोच के तहत एक भाई ने अपनी बहन की लाश घर पर ही रख दी ,क्योंकि वो उसकी मृत्यु हुई नहीं मान रहा था। अब गिरफ्तार होकर आजीवन जेल में सड़ेगा। अब सम्भालो पागलो को। आध्यात्मिकता और वास्तविकता का घालमेल न करे। कर्म करें ज्यादा मोक्ष मोक्ष न सोचे। कुछ लोग अन्न जल त्याग करके बिस्तर पर पड़े है मोक्ष के इंतज़ार में ये साधना नहीं पागलपन है ,मूर्खता है। तब तो अपने बच्चे को भी जन्म के बाद से ही भोजन -पानी कुछ न देकर जल्दी मोक्ष करवा दीजिये उसका भी ,क्योंकि बड़ा होगा तो पाप कर्म कर सकता है ,उन पाप के कर्मो का फल अगले जन्म में भोगेगा ,इसलिए उसे मुक्त कर दीजिये आप न बड़ा होगा न पाप करेगा ,पिछले जन्मो के कर्मो से आप जैसे मुर्ख के घर जन्म हुआ है उसका ,अब आगे पाप न करके उसको अन्न जल बचपन में ही त्याग करवा कर उसका मोक्ष संपन्न कीजिये जन्म से २ दिन में ही बैकुंठ पहुँच जाएगा। आपने सुना होगा कुछ लोग सामूहिक आत्महत्या करते हैं ये सोच कर कि मृत्यु के बाद का जीवन इससे ज्यादा सुखकर है। पागलपन ही कहेंगे न इस सोच को।
ज्योतिष के बेसिक का बैठता हुआ भट्ठा काफी चिंता का विषय है व्यक्तिगत तौर आधुनिक वक्त में मैं किसी भी ज्योतिष के प्रति जरा सा भी श्रधाशील नही हूँ, बात कड़वी जरूर है मगर सत्य बोल रहा हूँ। तीन दशक इस विद्या का अध्ययन करने के बावजूद शेखचिल्लियॉ की तरह भविष्यवाणियां करने की कोशिश कभी नही करता , इतने वक्त के बावजूद ज्योतिष को 10 प्रतिशत भी समझ पाया या नही संशय में रहता हूँ वहाँ बाज़ारवाद और विज्ञापन के सहारे ब्रह्मा बने हुए लोगो की बातें सुनकर हँसी भी आती है कोफ्त भी होती है।
एक नया प्रचलन तो और भी खतरनाक शुरू हो गया है, ज्योतिष के बेसिक से हट कर कोई भी स्वयंभू कुछ भी व्याख्या कर रहा है उसे अगर टोको तो बड़ा फैंसी जवाब आता है , 
Its according to nadi astrology...
और जिन्हें नाड़ी के बारे कुछ नही मालूम या जानकारी नही है वो चुप हो जाते है।
साथ मे ये अध्यात्म का झूठा चोचला कहाँ लेकर जाएगा सोचने का विषय है।

Monday, 21 May 2018

एक लकड़हारा था उसे एक बार लकड़ियाँ काटने का ठेका मिला उस लकड़हारे  ने पहले दिन ९  मन   लकड़ी काटी, दुसरे दिन ७   , तीसरे दिन ५  मन   ही., तब  मालिक ने उससे इसका कारण पूछा तो उसने बताया की मैं  तो निरंतर लकड़ी काटने में लगा रहता हु . मालिक ने कुल्हाड़ी देखी और पूछा की तुम कुल्हाड़ी पैनी करते हो या नहीं. मजदूर बोला में इस कार्य में समय वर्बाद नहीं करता. मालिक बोला इसी कारण तुम कम लकड़ी काट पा रहे हो. हर दिन २५-३० मिनट अपनी कल्हड़ी को पैनी करने में लगाओ... 

यह बात हम  सभी पर भी लागु होती है हम छात्र   है या नौकरी करते हैं   हमें अपने दिमाग  को तेज  करना ही पड़ेगा. सबसे पहले अपनी सोच को सकारात्मक  बनाइये . हम जैसा सोचते और महसूस करते हैं वैसे ही बन जाते हैं . सोच को सकारात्मनक  करने के लिए ज़रूरी है सकारात्मक विचारों को  पढे , अपने जीवन को एक नियम श्रंखला में बाँधे। 

Sunday, 20 May 2018



Herbs

रत्न के बदले मूल (पेड़ की जड़) पहनी जाती है ये सभी जानते हैं---मगर जड़ो के साथ-साथ कुछ ख़ास पेड़-पौधे भी हैं जो घर पर लगाये जाएँ तो ग्रह अच्छा फल देते हैं---
ग्रह ---------रत्न-----------जड़-----------------पेड़ पौधे
सूर्य------माणिक्य---बेल की जड़---सूर्यमुखी फूल,आम,पपीते का पेड़।
चन्द्र------मोती---------खिरनी-----------लौकी का पेड़।
मंगल-----मूंगा-------अनन्त मूल--------लाल-मिर्च।
बुध-------पन्ना-------विधारा -----------धनिया,सौंफ,मेथी।
गुरु------पुखराज-----केले की जड़------लौंग,केला,हल्दी का पेड़।
शुक्र-----हीरा--------स्वेत-लज्जावती---कच्चे आम,हरी मिर्च,सफ़ेद फूल।
शनि-----नीलम------शमी----------------सेव,नारंगी,निम्बू।
राहु-----गोमेद-----स्वेत-चन्दन----------सेव,नारंगी,निम्बू।
केतु---लहसुनिया--अश्वगंध--------------लाल मिर्च।

Spirituality

आजकल जिसे देखो अध्यात्म का झुनझुना बजा रहा है। कर्म चक्र बड़े बड़े महारथियों को समझ में नहीं आया अभी तक -कोई इतना आसान है इसे समझना? कहते हैं जीव हत्या न करो ,मगर एक किसान कीड़ो से बचाने के लिए क्या क्या छिड़काव करता है, क्या वो ये न करे? खाओगे क्या तब? घर में तिलचट्टे ,मच्छर मारने को क्या क्या यत्न नहीं करते न मारे? मर जाएँ मच्छर से कटवा कर मलेरिआ से? सर में जुएँ पड़ जाए तो न मारे उन्हें? मारते तो हैं जीव हत्या तो हो गई ये भी। जीव तो जीव ही है जब जीव हत्या की बात आती है तो सिर्फ बकरा-मुर्गा-गाय-मछली तक ही क्यों अटके फिर हर जीव को न मारने का प्रण ले। उत्तर इतना आसान नहीं , कोई ब्रह्मऋषि भी इसका उत्तर शायद ही दे पाये। क्या करोगे तो क्या फल मिलेगा ,इसका उत्तर बहुत कठीण है। अभी जिसे देखो आओ अध्यात्म अध्यात्म खेल रहा है जिसे देखो प्रवचन दे रहा है।