Tuesday, 30 May 2017
Friday, 19 May 2017
Tuesday, 16 May 2017
Nature of planets reflected in human
- सूर्य से प्रभावित व्यक्ति जहाँ जाता है वहां के वातावरण को स्थिति को अपने काबू में करना चाहता है।
- चन्द्र से प्रभावित व्यक्ति जहाँ जाएगा वहां के वातावरण में अपने को ढाल लेगा। वातावरण में माया ममता का रस घोलेगा।
- मंगल से प्रभावित व्यक्ति किसी भी हो रहे अन्याय के देख कर ज्यादा देर चुप नहीं रहेगा। पर कभी कभी जितना करेगा नहीं उससे जयादा नगाड़ा पीट देगा।
- बुध से प्रभावित व्यक्ति हर हाल में मजाक करेगा - युद्ध में गोली भी लग जायेगी तो कहेगा यार एक सेल्फ़ी तो ले लूँ क्या पता बच ही जाऊँ।
- बृहस्पति से प्रभावित व्यक्ति ,जहाँ उसके ज्ञान की कद्र नहीं होगी वहां नहीं टिकेगा और किसी को ज्ञान देने का मौका छोड़ेगा भी नहीं।
- शुक्र से प्रभावित व्यक्ति जहाँ भी जाएगा पहले अपने आराम का स्थान खोजेगा। गंदगी पसन्द नहीं करेगा।
शनि प्रभावित व्यक्ति को उसके अडिग निर्णय से हिलाना बहुत कठीण होता है।
Philosphy
बड़े उद्देश्यों को पूरा करने के नाम पर अपनी सुविधा के लिए कैसे ताकतवर लोग लाचारों और कमजोरो की कुर्बानियाँ जबरदस्ती ले लेते हैं।
कुछ ऐसी बातें जो साधारण तौर पर जातक को कंसल्टेंसी के वक्त बताना सम्भव नहीं होता वो यहाँ फॉलो कर सकते हैं।
१--- ६,८,१२ भावो की राशियाँ जिन रंगो का प्रतिनिधित्व करती है वो रंग आप कम इस्तेमाल करें।
२--- कोई भी दान लगातार न करे भले कोई भी ऐसा करने को बोल रहा हो।
३--- महामृत्युंजय मन्त्र जाप या बगलामुखी मन्त्र जाप या हवन पूजा तभी करवाइये जब जरुरत हो- मतलब रोग से परेशान है तो ''महामृत्युंजय जाप'' या पूजा हवंन करवाएं - शत्रु से परेशानी है तो बगलामुखी पूजा हवन करवाएँ - मतलब पूजा हवन भी जरुरत के अनुसार करवाए - इसका सीधा मतलब ये है कि आपको परीक्षा में पास होना है तो ''महामृत्युंजय'' जाप या पूजा का कोई मतलब नहीं - परीक्षा हॉल में आप ''कलम'' लेकर जाओगे या ''बन्दुक'' लेकर।
४--- रात को तामसिक भोजन कम करें।
५--- जिनका जन्म रात का है वो रात को क्रोध करने से बचें।
६--- ६,८,१२ की राशियाँ या ग्रह जिस भोजन का प्रतिनिधित्व करते हैं वो भोजन आप कम करें।
७--- अपनी सप्तमेश से सम्बंधित धातु का या वस्तु का दान न करें।
८--- पुरानी यादो से न चिपके ज्यादा। उदासी वाले गीत संगीत ज्यादा न सुने।
९--- अवसाद से निकलना हो तो अपने से कम उम्र के बच्चों से ज्यादा मिले मतलब कम उम्र के लोगो के बीच रहने की कोशिश करें - भले ही डीजे की धुन पर नाचे और कानफोड़ू संगीत ही क्यों न सुने।
१०--- हल्का फुल्का व्यायाम जरूर करे।
११--- हर समस्या का हल ''रत्नो'' या ''उपायों'' इत्यादि में न ढूंढे।
१२--- नकारात्मक बातें ज्यादा बताने वाले ज्योतिषी से भी दूर रहे।
१३--- किसी चमत्कार की आशा में किसी ''पाखण्डी'' के चक्कर में कभी न पड़े। कुछ लोग आपको हमेशा ऐसे मिलते रहेंगे जो बड़े ही आत्मविश्वाश के साथ आपकी सारी समस्यायों का हल चुटकी में ख़त्म करने का दावा करेंगे और और रहस्यमयी मुस्कान छोड़ेंगे। दूर रहिये इनसे। प्रकृति से जुड़िये -धार्मिक पुस्तकें पढ़िए।
१४--- गीता को पढ़िए -जीवन के लगभग ९०% सवालों के जवाब आपको मिल जाएंगे।
१--- ६,८,१२ भावो की राशियाँ जिन रंगो का प्रतिनिधित्व करती है वो रंग आप कम इस्तेमाल करें।
२--- कोई भी दान लगातार न करे भले कोई भी ऐसा करने को बोल रहा हो।
३--- महामृत्युंजय मन्त्र जाप या बगलामुखी मन्त्र जाप या हवन पूजा तभी करवाइये जब जरुरत हो- मतलब रोग से परेशान है तो ''महामृत्युंजय जाप'' या पूजा हवंन करवाएं - शत्रु से परेशानी है तो बगलामुखी पूजा हवन करवाएँ - मतलब पूजा हवन भी जरुरत के अनुसार करवाए - इसका सीधा मतलब ये है कि आपको परीक्षा में पास होना है तो ''महामृत्युंजय'' जाप या पूजा का कोई मतलब नहीं - परीक्षा हॉल में आप ''कलम'' लेकर जाओगे या ''बन्दुक'' लेकर।
४--- रात को तामसिक भोजन कम करें।
५--- जिनका जन्म रात का है वो रात को क्रोध करने से बचें।
६--- ६,८,१२ की राशियाँ या ग्रह जिस भोजन का प्रतिनिधित्व करते हैं वो भोजन आप कम करें।
७--- अपनी सप्तमेश से सम्बंधित धातु का या वस्तु का दान न करें।
८--- पुरानी यादो से न चिपके ज्यादा। उदासी वाले गीत संगीत ज्यादा न सुने।
९--- अवसाद से निकलना हो तो अपने से कम उम्र के बच्चों से ज्यादा मिले मतलब कम उम्र के लोगो के बीच रहने की कोशिश करें - भले ही डीजे की धुन पर नाचे और कानफोड़ू संगीत ही क्यों न सुने।
१०--- हल्का फुल्का व्यायाम जरूर करे।
११--- हर समस्या का हल ''रत्नो'' या ''उपायों'' इत्यादि में न ढूंढे।
१२--- नकारात्मक बातें ज्यादा बताने वाले ज्योतिषी से भी दूर रहे।
१३--- किसी चमत्कार की आशा में किसी ''पाखण्डी'' के चक्कर में कभी न पड़े। कुछ लोग आपको हमेशा ऐसे मिलते रहेंगे जो बड़े ही आत्मविश्वाश के साथ आपकी सारी समस्यायों का हल चुटकी में ख़त्म करने का दावा करेंगे और और रहस्यमयी मुस्कान छोड़ेंगे। दूर रहिये इनसे। प्रकृति से जुड़िये -धार्मिक पुस्तकें पढ़िए।
१४--- गीता को पढ़िए -जीवन के लगभग ९०% सवालों के जवाब आपको मिल जाएंगे।
Tuesday, 16 February 2016
Learn astrology in simple way first---
क्या २८ साल की उम्र के बाद मंगल का बुरा प्रभाव समाप्त हो जाता है ? बहुत यक्ष प्रश्न है जिसका उत्तर बड़े धैर्य से समझने की जरुरत न कि हमने फीस दी है आप हमारे दिमाग में ठुसिये ज्ञान को---
जिस तरह चार युग है और हम किस युग रहते है यानि काल का निर्णय होता है - इसी तरह ग्रहों की भी अपनी एक उम्र है और इसका तालमेल एक परिपक्व ज्योतिष ही बैठा सकता है , नहीं तो बातें गड्ड-मड्ड हो जाती है। हर ग्रह की परिपक्व होने की एक उम्र होती है उस निश्चित समय के बाद वो अपना बुरा प्रभाव कुछ हद्द तक कम कर देता है यानि उग्रता कम हो जाती है।
क्या २८ साल की उम्र के बाद मंगल का बुरा प्रभाव समाप्त हो जाता है ? बहुत यक्ष प्रश्न है जिसका उत्तर बड़े धैर्य से समझने की जरुरत न कि हमने फीस दी है आप हमारे दिमाग में ठुसिये ज्ञान को---
जिस तरह चार युग है और हम किस युग रहते है यानि काल का निर्णय होता है - इसी तरह ग्रहों की भी अपनी एक उम्र है और इसका तालमेल एक परिपक्व ज्योतिष ही बैठा सकता है , नहीं तो बातें गड्ड-मड्ड हो जाती है। हर ग्रह की परिपक्व होने की एक उम्र होती है उस निश्चित समय के बाद वो अपना बुरा प्रभाव कुछ हद्द तक कम कर देता है यानि उग्रता कम हो जाती है।
जैसे---
बृहस्पति १५ से २० की उम्र को अपने दखल में लेता है , यही वक्त है जब शिक्षा ग्रहण का महत्वपूर्ण समय होता है। { यहाँ ये तर्क कि शिक्षा ग्रहण की कोई उम्र नहीं होती बेमानी है } आप समझिए इस तथ्य को कि शिक्षा का यही समय महत्वपूर्ण होता है। बाकी ज्यादा उम्र में सभी नहीं पढ़ते कोई कोई जिसकी ग्रह दशा इजाजत देती है वही बुढ़ापे में पढाई करते हैं।
सूर्य का समय २२ साल की उम्र का।
चन्द्रमा का समय है २४ साल का वक्फा यानि ये peak टाइम कहलाता है।
शुक्र का समय २५ से २७ peak २५ ..
मंगल का समय २८ से ३१ peak समय २८. का कहलाता है।
बुध का समय ३१ से ३५ peak समय ३२
शनि ३६ से ३९ peak समय ३६
राहु ४२ से ४७ peak समय ४२ का
केतु का परिपक्व होने का समय ४८ से ५४ peak ४८ का
यानि यहाँ ग्रहो की जो उम्र लिखी हुई है उस उम्र के बाद ग्रह अपनी उग्रता खोता है अपने बुरे फल को देने में कमी आ जाती है। अब यहाँ इस तथ्य को ध्यान दे कि जिस ग्रह की जो उम्र यहाँ दी हुई है उसी दौरान विंशोत्तरी महादशा के के अनुसार उसी ग्रह की दशा-अन्तर्दशा आ जाए तो ग्रहो का अच्छा बुरा फल दोनों तीब्रता से मिलता है।
अब लौटे मंगल की तरफ , जैसा की विश्लेषण में कई बार मैने बताया एक ख़ास उम्र के बाद ग्रह परिपक्व होते हैं , यानि एक इंसान जब ४० की उम्र के बाद परिपक्व होता है तो बच्चो जैसी गलतियाँ नहीं करता , इसी तरह एक ख़ास उम्र के बाद ग्रह भी समझदार होते हैं , अब इसे जरा दूसरे तरीके से देखे कि एक बीस साल का लड़का जितना उग्र होगा तीस साल वाला उतना उग्र नहीं हो सकता और मंगल उग्रता का ही मुख्य ग्रह है , इसलिए जिनकी कुण्डली में मांगलिक दोष का सचमुच प्रभाव है वो अट्ठाईश साल की उम्र के बाद विवाह करे तो मंगल का बुरा फल उनको कुछ कम मिलता है , इसे यूँ समझे कि चौबीस साल की उम्र का लड़का अगर मार कर सर फोड़ देगा तो -तीस साल वाला मारने को उठेगा मगर गालियाँ देकर ही शांत हो जाएगा , हाँ यहाँ एक बात है -मंगल के बुरे प्रभाव की वजह से शारीरिक हिंसा में ही कमी आएगी -अगर मंगल सचमुच बुरा फल देने वाला है तो - गालीगलौज और झगड़ा होता रहेगा सिर्फ शारीरिक हिंसा में कमी आएगी - अब कुंडली का गुरु अच्छा है तो और कमी आएगी -शनि मजबूत है तो झगड़ा होगा। मंगल का अट्ठाइस के बाद मूल रूप से हिंसक होना कम हो जाता है जातक का।
बृहस्पति १५ से २० की उम्र को अपने दखल में लेता है , यही वक्त है जब शिक्षा ग्रहण का महत्वपूर्ण समय होता है। { यहाँ ये तर्क कि शिक्षा ग्रहण की कोई उम्र नहीं होती बेमानी है } आप समझिए इस तथ्य को कि शिक्षा का यही समय महत्वपूर्ण होता है। बाकी ज्यादा उम्र में सभी नहीं पढ़ते कोई कोई जिसकी ग्रह दशा इजाजत देती है वही बुढ़ापे में पढाई करते हैं।
सूर्य का समय २२ साल की उम्र का।
चन्द्रमा का समय है २४ साल का वक्फा यानि ये peak टाइम कहलाता है।
शुक्र का समय २५ से २७ peak २५ ..
मंगल का समय २८ से ३१ peak समय २८. का कहलाता है।
बुध का समय ३१ से ३५ peak समय ३२
शनि ३६ से ३९ peak समय ३६
राहु ४२ से ४७ peak समय ४२ का
केतु का परिपक्व होने का समय ४८ से ५४ peak ४८ का
यानि यहाँ ग्रहो की जो उम्र लिखी हुई है उस उम्र के बाद ग्रह अपनी उग्रता खोता है अपने बुरे फल को देने में कमी आ जाती है। अब यहाँ इस तथ्य को ध्यान दे कि जिस ग्रह की जो उम्र यहाँ दी हुई है उसी दौरान विंशोत्तरी महादशा के के अनुसार उसी ग्रह की दशा-अन्तर्दशा आ जाए तो ग्रहो का अच्छा बुरा फल दोनों तीब्रता से मिलता है।
अब लौटे मंगल की तरफ , जैसा की विश्लेषण में कई बार मैने बताया एक ख़ास उम्र के बाद ग्रह परिपक्व होते हैं , यानि एक इंसान जब ४० की उम्र के बाद परिपक्व होता है तो बच्चो जैसी गलतियाँ नहीं करता , इसी तरह एक ख़ास उम्र के बाद ग्रह भी समझदार होते हैं , अब इसे जरा दूसरे तरीके से देखे कि एक बीस साल का लड़का जितना उग्र होगा तीस साल वाला उतना उग्र नहीं हो सकता और मंगल उग्रता का ही मुख्य ग्रह है , इसलिए जिनकी कुण्डली में मांगलिक दोष का सचमुच प्रभाव है वो अट्ठाईश साल की उम्र के बाद विवाह करे तो मंगल का बुरा फल उनको कुछ कम मिलता है , इसे यूँ समझे कि चौबीस साल की उम्र का लड़का अगर मार कर सर फोड़ देगा तो -तीस साल वाला मारने को उठेगा मगर गालियाँ देकर ही शांत हो जाएगा , हाँ यहाँ एक बात है -मंगल के बुरे प्रभाव की वजह से शारीरिक हिंसा में ही कमी आएगी -अगर मंगल सचमुच बुरा फल देने वाला है तो - गालीगलौज और झगड़ा होता रहेगा सिर्फ शारीरिक हिंसा में कमी आएगी - अब कुंडली का गुरु अच्छा है तो और कमी आएगी -शनि मजबूत है तो झगड़ा होगा। मंगल का अट्ठाइस के बाद मूल रूप से हिंसक होना कम हो जाता है जातक का।
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